आधुनिकीकरण और विस्ता

 

आधुनिकीकरण और विस्तार

वर्ष 2009-10 कंपनी के लिए उपलब्धि भरा साल रहा। भारत सरकार द्वारा यूरिया क्षेत्र में लाभकारी निवेश नीतियों की अधिसूचना के परिणामस्वरूप कंपनी ने निम्नलिखित कई परियोजनाएं शुरू की हैं:-

पानीपत, बठिण्डा और नांगल में ईंधन-तेल आधारित संयंत्रों का पुनरुद्धार

कंपनी ने एफओ/एलएसएसएस फीडस्टॉक से सस्ते और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत अर्थात् एनजी/आरएलएनजी में परिवर्तित करने के लिए पानीपत, बठिण्डा और नांगल में ईंधन तेल आधारित संयंत्रों का पुनरुद्धार शुरू किया है। इन परियोजनाओं की शून्य तारीख 29 जनवरी, 2010 निर्धारित की गई है। इन परियोजनाओं में कुल 4066 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा और शून्य तारीख अर्थात् 29 जनवरी 2010 से समापन अवधि 36 माह होगी। मैसर्स लार्सन एंड ट्रूब्रो (एलएंडटी) के साथ 10 मार्च 2010 को पानीपत और बठिण्डा इकाइयों का पुनरुद्धार करने तथा नांगल इकाई के पुनरुद्धार हेतु मैसर्स टेक्नमोंट आईसीबी (टीआईसीबी) के परिसंघ के साथ 12 मई, 2010 को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। मैसर्स प्रोजेक्ट्स एंड डेवलेपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल) को सभी परियोजनाओं के लिए परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता के रूप में नियुक्त किया गया है। इन परियोजनाओं से न केवल पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सकेगा  बल्कि भारत सरकार के खाते से राजसहायता देने में भी बचत होगी।

विजयपुर में क्षमता विस्तार और ऊर्जा बचत परियोजना (ईएसपी)

कंपनी ने विजयपुर-। और ।। में यूरिया संयंत्रों का क्रमश: 16% और 23% क्षमता विस्तार करना शुरू कर दिया है जिसमें लगभग 620 करोड़ रुपए के अनुमानित निवेश से कार्बन डाईऑक्साइड रिकवरी संयंत्र की स्थापना करना शामिल है। विजयपुर-। में ऊर्जा बचत परियोजना तथा विजयपुर-।। में क्षमता विस्तार परियोजना के पूरा होने के बाद कुल यूरिया क्षमता के 626/एमटीपीडी होने की संभावना है। अमोनिया-।, अमोनिया-।।, यूरिया-। और यूरिया-।। के लिए मूल इंजीनियरिंग कार्य पूरा कर लिया गया है। उपकरणों की खरीद चल रही है।

परियोजनाओं के वर्ष 2011-2012 तक चालू होने की संभावना है। इन क्षमता विस्तार के चालू होने से कंपनी की कुल क्षमता 10% बढ़ जाएगी।