नेशनल फर्टिलाइज़र्स लिमिटेड
पृष्ठभूमि नोट
नेशनल फर्टिलाइज़र्स लिमिटेड - शैड्यूल-ए, प्रथम श्रेणी की मिनी-रत्न कम्पनी का निगमन 23 अगस्त, 1974 को फीड-स्टॉक / एल.एस.एच. एस. की गैसिफिकेशन तकनीक पर आधारित 5.11 लाख टन क्षमता वाले दो उर्वरक संयंत्र, एक बठिण्डा (पंजाब) तथा दूसरा पानीपत (हरियाणा) में लगाने के लिए हुआ । इन संयंत्रों से वाणिज्यक उत्पादन क्रमश: 1-10-1979 एवं 1-09-1979 से प्रारम्भ हुआ । अप्रैल 1978 में एन.एफ.एल.-एफ.सी.आई. के पुनर्गठन के परिणामस्वरुप फर्टिलाइजर कारपोरेशन आफ इंडिया (एफसीआई) के नंगल यूनिट (नंगल विस्तार परियोजना सहित) को एन.एफ.एल. को हस्तांतरित किया गया ।
वर्ष 1984 में भारत सरकार ने विजयपुर, जिला गुना (मध्य प्रदेश) में 7.26 लाख टन वार्षिक यूरिया की क्षमता वाली प्राकृतिक गैस पर आधारित देश की पहली अन्तर्देशीय परियोजना की स्थापना का कार्य एन.एफ.एल. को सौंपा जिसमें 1-07-1988 से वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ हुआ । विजयपुर संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता को दोगुना करने के लिए वर्ष 1993 में विजयपुर विस्तार परियोजना आरम्भ की गई जिसमें वाणिज्यिक उत्पादन 31.3.1997 से आरम्भ हुआ । उर्वरक विभाग ने 1 अप्रैल,2000 से विजयपुर संयंत्रों की वार्षिक स्थापित क्षमता का पुर्ननिर्धारण करके 7.26 लाख टन यूरिया से बढ़ाकर 8.64 लाख टन यूरिया (प्रत्येक) कर दिया ।
नंगल यूनिट की उत्पादन क्षमता को 3.30 लाख टन से बढ़ाकर 4.78 लाख टन वार्षिक करने के लिये यूनिट के यूरिया संयंत्र में सुधार कार्य आरम्भ किया गया । सुधार कार्य के पश्चात इस संयंत्र में वाणिज्यिक उत्पादन 1.2.2001 से आरम्भ हुआ जिससे एन.एफ.एल. में यूरिया की कुल वार्षिक स्थापित उत्पादन क्षमता 32.31 लाख टन (अर्थात नाईट्रोजनी उर्वरक के रुप में 14.86 लाख टन) हो गई है ।
कम्पनी जैव-उर्वरक के साथ-साथ विभिन्न औद्योगिक उत्पादों का भी उत्पादन करती है जैसे कि नाइट्रिक ऐसिड, अमोनियम नाइट्रेट, सोडियम नाइट्राइट, सोडियम नाइट्रेट, सल्फर, मेथानोल, आर्गन गैस, तरल नाइट्रोजन, तरल आक्सीजन इत्यादि ।
विजयपुर स्थित जैव-उर्वरक संयंत्र में जैव-उर्वरक के तीन स्ट्रेन्ज़ (ठोस एवं तरल) पी एस बी, रिज़ोबियम और अज़ोटोबैक्टर का उत्पादन किया जाता है । कम्पनी ने 'किसान माइकोरिज़ा' ब्राण्ड नाम से विशेष फंगस आधारित जैव-उर्वरक 'माइकोरिज़ा' का विपणन आरम्भ किया है ।
एन एफ एल द्वारा विकसित संवर्धित नीम लेपित यूरिया, जिसे अपने प्रभावकारी गुणों के कारण व्यापक मान्यता मिली है, का उत्पादन एन एफ एल के तीन यूनिट, पानीपत, बठिण्डा तथा विजयपुर में किया जा रहा है । एन एफ एल भारत में पहली कम्पनी है जिसे सरकार ने नीम लेपित यूरिया के उत्पादन एवं विपणन की अनुमति दी है ।
किसानों को विभिन्न कृषि-उत्पाद 'एक स्थानीय लेनदेन' ('सिंगल विंडो अवधारणा') के अधीन उपलब्ध करवाने के लिये कम्पनी इस समय विभिन्न कृषि-इनपुट्स जैसे कि क्वालिटी बीज, कम्पोस्ट खाद, कीटनाशक, हर्बीसाइड्स, आयतित एम ओ पी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) इत्यादि का व्यापार कर रही है । कम्पनी ने व्यापार के माध्यम से कुछ और उत्पाद जैसे माइक्रो-न्यूट्रीऐन्ट्स (ज़िक सल्फेट), एस एस पी (सिंगल सुपर फास्फेट), बैंटोनाइट सल्फर, आयतित डी ए पी तथा मिश्रित खाद आदि को भी जोड़ने की पहल की है । कम्पनी अपने मौजूदा डीलर-तंत्र के माध्यम से किसानों को भारत संचार निगम लिमिटेड के उत्पादों की बिक्री भी कर रही है । कम्पनी के विपणन तंत्र में नोएडा स्थित केन्द्रीय विपणन कार्यालय, भोपाल, लखनऊ तथा चण्दीगढ़ स्थित तीन आंचलिक कार्यालय तथा देशभर में फैले 13 राज्य तथा 39 क्षेत्रीय कार्यालय आते हैं ।
31 मार्च, 2012 को कम्पनी की अधिकृत पूंजी
1000 करोड़ तथा प्रदत्त पूंजी
490.58 करोड़ है, जिसमें भारत सरकार का हिस्सा
479 करोड़ (97.64 ) है और शेष
11.58 करोड़ (2.36 ) वित्तीय संस्थाओं तथा अन्यों के पास है ।
आधुनिकीकरण एवं विस्तार परियोजनाएं
मार्किट लीडर के रुप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिये, कम्पनी के विभिन्न संयंत्रों में लगभग
4700 करोड़ की परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं । प्रमुख योजनाएं निम्न प्रकार हैं :
पानीपत, बठिण्डा एवं नंगल में इंर्धन तेल पर आधारित संयंत्रों का रीवैम्प
कम्पनी में इंधन तेल पर आधारित संयंत्र, पानीपत, बठिण्डा तथा नंगल, के फीड स्टॉक को इंधन तेल से प्राकृतिक गैस में बदलने हेतु तीन परियोजनाओं पर रीवैम्प कार्य चल रहा है । इन परियोजनाओं पर कुल निवेश
4066 करोड़ का होगा और इन परियोजनाओं के शून्य तिथि, जो कि 29 जनवरी, 2010 थी, से पूरा होने की अवधि 36 माह है । इन परियोजनाओं का कार्य लम्पसम टर्नकी (एल एस टी के) आधार पर किया जा रहा है । पानीपत व बठिण्डा परियोजनाएं हालदर एवं टोपसो के प्रोसैस लाइसेंस के साथ मैसर्ज लारसन एवं टुबरो (एल एण्ड टी) के द्वारा कार्यान्वित की जा रही हैं । नंगल परियोजना, के बी आर से प्रोसैस लाइसेंस के साथ, मैसर्ज टैक्नीमोंट एस पी ए इटली तथा टैक्नीमोंट आई सी बी, मुम्बई के कंसोरटियम द्वारा कार्यान्वित की जा रही हैं । इन तीनों परियोजनाओं के लिये मैसर्ज प्रोजैक्ट एवं डवलपमेंट इण्डिया लि. (पी डी आई एल को) को परियोजना प्रबंधन सलाहकार नियुक्त किया गया है । पानीपत एवं बठिण्डा यूनिट की शैडयूल्ड कमीशनिंग तारीख जनवरी, 2013 तथा नंगल यूनिट की दिसम्बर, 2012 है ।
विजयपुर यूनिट में उर्जा बचत एवं क्षमता में वृद्धि के लिये रीवैम्प परियोजना तथा कार्बन डाइऑक्साइट रिकवरी (सीडीआर) परियोजना ।
कम्पनी ने विजयपुर I तथा II में अमोनिया एवं यूरिया संयंत्रों की क्षमता में वृद्धि तथा कार्बन डाइऑक्साइट रिकवरा प्लांट (सीडीआर) की स्थापना का काम आरम्भ किया है जिसपर लगभग
650 करोड़ रुपये का निवेश होगा । इस परियोजना के आरम्भ हो जाने के बाद विजयपुर यूनिटों में यूरिया की कुल वार्षिक क्षमता 17.29 लाख टन से बढ़कर 20.66 लाख टन हो जायेगी । इन परियोजनाओं के अप्रैल/जून, 2012 में आरम्भ होने की संभावना है । सी डी आर परियोजना के जून, 2012 में आरम्भ होने का अनुमान है ।
देश तथा विदेश में नाइट्रोजीनियस, फासफैटिक और पोटाशिक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाश करने तथा देश और विदेश में परियोजनाओं की स्थापना के लिये परामर्शात्मक सेवाएं प्रदान करने हेतु एन एफ एल ने मैसर्ज कृभको और आर सी एफ के साथ मिलकर एक संयुक्त उद्यम कम्पनी ''विदेश उर्वरक लिमिटेड'' का गठन किया है ।
कम्पनी को नामांकन के आधार पर, मैसर्ज इ आई एल तथा मैसर्ज सेल के साथ संयुक्त उद्यम बनाकर एच एफ सी के रामागुण्डम तथा एफ सी आई के सिन्दरी यूनिट के पुनर्रुद्धार का कार्य सौंपा गया है ।
उत्पादन परफारमैन्स
वर्ष 2011-12 के दौरान कम्पनी ने 34.01 लाख टन यूरिया का उत्पादन करके 105.3 स्थापित क्षमता का उपयोग किया जबकि पिछले वर्ष का कुंल उत्पादन 33.80 लाख मी. टन था । कम्पनी ने वर्ष 2011-12 के दौरान 6,39,568 टन नीम लेपित यूरिया का अब तक का सर्वाधिक उत्पादन किया जबकि नीम लेपित यूरिया का वर्ष 2010-11 का उत्पादन 1,20,067 टन था ।
बिक्री एवं विपणन
कम्पनी ने 2011-12 के दौरान 33.90 लाख मी.टन यूरिया की बिक्री की । गत वर्ष 33.59 लाख मी. टन यूरिया की बिक्री की गई थी । कम्पनी ने वर्ष के दौरान औद्योगिक उत्पादों की अब तक की सर्वाधिक,
174 करोड़ (प्रोविज़िनल) बिक्री की जबकि गत वर्ष 2010-11 में यह बिक्री
120 करोड़ की थी । वर्ष के दौरान कम्पनी ने
3762.05 लाख कीमत का 23124 मी. टन अमोनियम नाइट्रेट (मैल्ट) बेचा । इस वर्ष के दौरान एक नया उत्पाद नाइट्रिक ऐसिड (100 लैवल के बराबर कंसट्रेशन) 49853 मी.टन, 3395 मी. टन सोडियम नाइट्रेट, 1410 मी टन सोडियम नाइट्राइट, 695352 NM3 आर्गन, 10699 मी टन सल्फर, 877817 NM3 तरल आक्सीजन आदि की बिक्री की ।
वित्तीय परफामैन्स
वर्ष 2011-12 के दौरान कम्पनी की टर्नओवर
7286 करोड़ (प्रोविज़िनल) रही जबकि वर्ष 2010-11 में यह टर्नओवर
5791 करोड़ थी । गत वर्ष के मुकाबले टर्न ओवर में वृद्धि बिक्री की उच्चतर मात्रा, पैट्रालियम पदार्थों एवं प्राकृतिक गैस की बढ़ी हुई कीमत तथा विजयपुर-II में यूरिया की इम्पोर्ट पैरिटी प्राइस पर कट-ऑफ मात्रा से अधिक एकाउण्टल सेल के कारण है ।
पुरस्कार एवं मान्यताएं
कम्पनी की परफारमैन्स हर क्षेत्र में शानदार रही है जिसके कारण इसे विभिन्न संस्थाओं से मान्यताएं प्राप्त हुई है । कम्पनी ने वर्ष 2010-11 के लिये एमओयू के अन्तर्गत लगातार 11 वीं बार 'उत्कृट' रेटिंग प्राप्त की है । कम्पनी ने वर्ष 2011-12 के दौरान निम्नलिखित प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किये हैं :
क) हरियाणा सरकार से पानीपत यूनिट को ''न्यूनतम दुर्घटना आवृत्ति दर'' के लिये दो राज्य स्तरीय सुरक्षा अवार्ड; 2009 के लिये विजेता तथा 2008 के लिये उप-विजेता ।
ख) इन्टस्टीच्यूट ऑफ कॉस्ट एवं वर्क्स एकाउण्टैंण्टस ऑफ इण्डिया, नई दिल्ली से बड़े सार्वजनिक क्षेत्र की श्रेणी में 'लागत प्रबन्धन' में उत्कृष्टता के लिये वर्ष 2010 का प्रथम पुरस्कार ।
ग) सुश्री नीरु अबरोल, निदेशक (वित्त) को इन्स्टीच्यूट ऑफ चार्टेट एकाउण्टैंण्टस ऑफ इण्डिया की ओर से महिला श्रेणी में 'बिजनेस एचीवर अवार्ड '। इस अवार्ड का मूल्यांकन प्रख्यात व्यक्तियों के जूरी पैनल ने किया था जिसके अध्यक्ष, इनफोसिस के चीफ मैंटर श्री एन आर नारायण मूर्ति थे ।
घ) सुश्री नीरु अबरोल, निदेशक (वित्त) को वर्ष 2009-10 के लिये सभी केन्द्रीय सार्वजनिक संस्थानों में ''उत्कृष्ट महिला प्रबन्धक का स्कोप उत्कृष्टता अवार्ड । यह अवार्ड विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत के माननीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रदान किया गया ।
कारपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) व कृषि विस्तार गतिविधियाँ
वर्ष 2010-11 तथा 2011-12 के लिये कम्पनी ने सी एस आर गतिविधियों के लिये क्रमश:
3.0 करोड़ तथा
3.25 करोड़ की राशि निश्चित की है जिसमें से 31.03.2012 तक
1.90 करोड़ (अनुमानित) खर्च किये जा चुके हैं और सार्वजनिक उद्यम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार `4.35 करोड़ वर्ष 2012-13 में आगे ले जाये जा रहे हैं । सी एस आर के अन्तर्गत यूनिटों तथा विपणन प्रभाग द्वारा विभिन्न ज़िलों जैसे कि मध्य प्रदेश में गुना, होशंगाबाद तथा इन्दौर, महाराष्ट्र में जलगांव, हिमाचल प्रदेश में सोलन, पंजाब में नंगल तथा बठिण्डा, हरियाणा में पानीपत, उत्तर प्रदेश में झांसी तथा बदायुं और ओड़ीसा में बालासोर तथा म्यूरंगज में किये गये कार्य का विवरण निम्नानुसार है:
क) बुनियादी सुविधाएं : पीने के पानी की सुविधा, पहंुच मार्ग, शौचालय, पानी के टैंक, नलकूप, ओवर हैड टैंक, आंगनवाड़ीयाँ, कम्पोस्ट संरचना जैसे एन ए डी ई पी / वर्मी पिट्स, किसानों को कम लागत से खेती करने पर प्रशिक्षण इत्यादि ।
ख) बाल शिक्षा : उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा राज्य के विभिन्न गांवों में स्थित प्राथमिक तथा माध्यमिक विद्यालयों में किचन शैड का निर्माण, चारदीवारी, खेल के बुनियादी ढांचे, फोर्स लिफ्ट पंप, फर्नीचर, कम्पयूटरज़, छत के पंखे उपलब्ध करवाये गये । 2245 लाभार्थियों को लाभ हुआ ।
ग) महिला सशक्तिकरण : उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश राज्य में बहुउद्देशीय महिला सशक्तीकरण केन्द्र, सिलाई मशीन, आटा और मसाला पीसने की चक्की उपलब्ध करवाई गई तथा सिलाई / कढ़ाई / फूड प्रोसैसिंग / ब्युटिशियन / सैनेटरी पैड बनाना / सॉफ्ट खिलौने इत्यादि बनाने का प्रशिक्षण दिया गया । 312 लाभार्थियों को लाभ हुआ ।
घ) वनीकरण : लगभग 73000 पेड़ लगाये गये ।
ड) सौर-लाईटों की स्थापना : उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब एवं हरियाणा राज्य के 8 गोद लिये गये गांवों में 45 सोलर लाइटें लगाई गई ।
च) बाल एवं महिला स्वास्थ्य शिविर : उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा एवं महाराष्ट्र राज्य के विभिन्न गांवों में 20 बाल एवं महिला स्वास्थ्य शिविर लगाये गये । 5546 लाभार्थियों को लाभ हुआ ।
छ) पशु स्वास्थ्य शिविर : उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान एवं महाराष्ट्र राज्य के विभिन्न गांवों में 20 पशु स्वस्थ्य शिविर लगाये गये । 7270 लाभार्थियों को लाभ हुआ ।
ज) जल संचयन / जमीन के नीचे के पानी को रिचार्ज करना : 7 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया (भोपाल ज़ोन में 4 रोक बांध, चण्दीगढ़ ज़ोन में 2 तालाबों का पुनर्रुद्धार तथा एक जल संचयन टैंक का निर्माण) ।
पर्यावरण प्रबंधन
कम्पनी, औद्योगिक सुरक्षा, पारिस्थितिकी तथा प्रदूषण नियंत्रण को अत्यधिक वरियता देती है । कम्पनी ने अपने संयंत्रों को शून्य ऐफ्लयुएंट डिस्चार्ज संयंत्र बनाने के उद्देश्य से तीन Rs अर्थात reduce, reuse, recycle (कमी करना, पुन: प्रयोग तथा रीसाइकिल) अप्रोच को अपनाया है । कम्पनी ने गहन वनीकरण कार्यक्रम का अपनाया है । यूनिटों द्वारा सांविधिक मानदण्ड पूरे किये जाते हैं । नंगल, पानीपत तथा बठिण्डा में डैंस फेज़ न्युमैटिक कनवेइंग सिस्टम का उपयोग करके ईएसपी हूपऱ्ज से फ्लाई ऐश इकट्टी करने के लिये साइलो सिस्टम की स्थापना की गई है ताकि संयंत्रों से फ्लाई ऐश को निकाला जा सके । इस प्रणाली से फ्लाई-ऐश डिस्पोज़ल के साथ जुड़ी हुई पारिस्थितिकी समस्याओं में कमी हुई है ।
सभी यूनिट गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था के लिये आई एस ओ 9001-2000 तथा पर्यावरण प्रबंधन व्यवस्था के लिये आई एस ओ - 14001 से प्रमाणित हैं । सभी यूनिटों को व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रबन्धन व्यवस्था के लिये ओ एच एस ए एस 18001 प्राप्त है ।
कम्पनी विजयपुर में प्राईमरी रिफारमर की फ्यूल गैसों से प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड की रिकवरी के लिये 450 एमपीटीडी क्षमता के कार्बन डाइऑक्साइड रिकवरी प्लांट की स्थापना कर रही है । इससे ग्रीन हाउस गैसों के डिस्चार्ज में कमी आयेगी ।
मानव संसाधन प्रबन्धन
कम्पनी ने मानव संसाधन को सदा अत्यधिक महत्वपूर्ण असैट माना है और इसके विकास एवं इसकी क्षमता के पूर्ण उपयोग के लिये निरंतर कार्यशील रही है । विकास एवं प्रेरक वातावरण को बढ़ावा देने के लिये वर्ष के दौरान कई प्रकार की पहल की गई । कार्यकारियों और गैर-कार्यकारियों के लिये परफारमैंस रिलेटिड संशोधित पे स्कीम को लागू की गई है और ग्रुप प्रोडक्टिविटी अलाउंस योजना भी शुरु कीह गई द है । सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी के निधन/स्थाई तौर पर विकलांग होने की स्थिति में परिवार के कल्याण हेतु कम्पनी ने 'कर्मचारी आर्थिक एवं सामाजिक पुनर्वास योजना' लागू की है । कर्मचारियों के हितार्थ एक नई पेंशन योजना को भी अंतिम रुप दिया जा रहा है ।
सुपरवाईज़री एवं प्रबंधकीय वर्ग में नैतिकता, नेतृत्व की क्षमता एवं उच्च मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कम्पनी ने वर्ष के दौरान कर्मचारियों को बाहरी एवं इनहाउस प्रशिक्षण के लिये भेजकर, प्रशिक्षण के 8900 श्रमदिवस एग्ज़िक्यूटिवज़ के लिये तथा 9530 श्रमदिवस गैर-एग्ज़िक्युटिवज़ के लिये प्राप्त किये । 31.03.2012 को कम्पनी की मैन-पावर 4515 थी जिसमें 1942 एग्जिक्युटिव तथा 2573 नान-एग्ज़िक्युटिव थे ।
वर्ष के दौरान नियोक्ता-कर्मचारी संबंध सौहार्दपूर्ण रहे । प्रतिकूल औद्योगिक-सम्बन्धों के कारण उत्पादन में कोई हानि नहीं हुई । प्रबंधन में कर्मचारियों की भागीदारी की योजनाएं सफलतापूर्वक कार्यान्वित की जा रही हैं । कर्मचारियों एवं कम्पनी के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुये प्रबंधन एवं कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर निरंतर विचार-विमर्श हुआ ।
कम्पनी अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य, भलाई एवं कल्याण के लिये निरंतर प्रयास कर रही है तथा कर्मचारियों के मनोरंजन, शिक्षा तथा सार्वजनिक हित के लिये कदम उठाए गये हैं ।