हरित पहलें

हरित पहलें

पर्यावरण नीति

एनएफएल निम्नलिखित द्वारा पर्यावरणीय प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) अपनाकर पर्यावरण और संतुलित पारिस्थितिकी प्राप्त करने के लिए वचनबद्ध है।

• कार्पोरेट नीति के रूप में पर्यावरणीय प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) लागू करना तथा सुधार के लिए सतत् प्रयास करना।

• पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर जागरूकता पैदा करने के लिए ठेकेदार (यदि स्थल पर कोई कार्य कर रहा है) सहित कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना और अभिप्रेरित करना।

• किसी नई परियोजना का योजना शुरू करने और किसी स्थापित क्षमता को बंद करने से पहले पर्यावरण पहलुओं का आकलन करना।

• कंपनी द्वारा बेचे जाने वाले उत्पादों के सुरक्षित उपयोग, परिवहन, भण्डारण और निपटान में ग्राहकों को सलाह देना और शिक्षित करना।

• अपशिष्ट सृजन और परिणामस्वरूप प्रतिकूल पर्यावरण प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए उत्पादन संयंत्रों और उपयोगिताओं का दक्षतापूर्वक प्रचालन करना।

• प्रोसेस प्रौद्योगिकी में सुधार और विकास करना।

• आपात प्रबंधन योजना का विकास और रखरखाव करना।

• नियमित पर्यावरणीय आडिट करना तथा सांविधिक और कानूनी आवश्यकताओं का अनुपालन करना।

हरित पहलें:

प्रदूषण नियंत्रण: कंपनी ने पर्यावरणीय मानकों और कानूनों का अनुपालन करते हुए सभी इकाइयों में प्रदूषण-तत्वों का नियंत्रण और निगरानी करने की एक प्रणाली स्थापित की है। संसाधन संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण की रोकथाम करना हमारी कंपनी में पर्यावरणीय उत्कृष्ट के प्रेरक तत्व हैं।

संयंत्रों से राख को निकालने के लिए पानीपत और बठिण्डा इकाइयों में डेन्स फेज न्यूमेटिक सूचना प्रणाली का प्रयोग करके ईएसपी होप्पर्स से फ्लाई एश एकत्रित करने के लिए साइलो प्रणाली स्थापित की गई है। सभी इकाइयां गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ 9001-2000, पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ-14001 प्रमाणित हैं और व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के लिए ओएचएसएएस-18001 प्रमाण-पत्र प्राप्त हैं। ऐसी परियोजनाएं शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं जिनसे कंपनी स्वच्छ, विकास प्रणाली के अंतर्गत कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सके। कंपनी विजयपुर में प्राइमरी रिफार्मर के फ्लू गैसों से कार्बन डाइऑक्साइड की रिकवरी हेतु 450 एमटीपीडी क्षमताओं के लिए कार्बन डाइऑक्साइड रिकवरी संयंत्र लगा रही है। इससे ग्रीन हाउस गैसों के निर्वहन में भी कमी करने में मदद मिलेगी।

सामाजिक वानिकी को एनएफएल में हमेशा से ही उच्च प्राथमिकता दी गई है जो देश को हरा-भरा बनाने की दिशा में एक प्रयास है। कंपनी की प्रत्येक इकाई में ‘वन-महोत्सव’ मनाने के अलावा, नीम, जामुन, आम आदि जैसी पारंपरिक रूप से उपयोग किस्मों की पौध वितरित की गई थीं तथा उन्हें कंपनी के विपणन प्रभाग द्वारा विभिन्न गांवों में पौधरोपण किया गया था। वर्ष 2007-08 के दौरान लगभग 2000 पौध तथा वर्ष 2008-09 के दौरान 3300 पौध लगाई गई थीं। वर्ष 2009-10 के दौरान सामाजिक वानिकी के अंतर्गत विभिन्न स्थलों पर 38 कार्यकलाप चालू किए गए थे।

सौर प्रकाश-व्यवस्था के लिए सौर सेलों का प्रयोग करके सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है जो सौर ऊर्जा (सूरज की रोशनी) को सीधे बिजली में परिवर्तित कर देता है। बिजली को बैटरियों में जमा करके रखा जाता है और जहां-कहीं आवश्यकता हो, प्रकाश-व्यवस्था के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाता है। ये प्रणालियां गैर-विद्युत ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी हैं और महत्वपूर्ण घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रयोगों के लिए एक विश्वसनीय आपात प्रकाश-व्यवस्था प्रणाली है। हरित पहल और स्थायी विकास लागू करने के नए क्षेत्रों की तलाश करने की प्रतिबद्धता के रूप में नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड में विभिन्न गांवों में वर्ष 2007-08 में 22 इकाइयों, वर्ष 2008509 में 28 इकाइयों और वर्ष 2009-10 में 38 इकाइयों की स्थापना की है।

वर्षा जल एकत्रीकरण:  वर्षा जल को जमा करने और उसके जलाशय में पहुंचने से पहले पुन: इस्तेमाल करने की योजना है। इसका प्रयोग पेयजल उपलब्ध कराने, पशुधन, सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने, तथा अन्य विशिष्ट 3 पहलों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। मकानों, टैंकों और स्थानीय संस्थानों की छत से एकत्रित वर्षाजल को पेयजल की उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह उप मृदा जल स्तर तथा हरियाली बढ़ाने में सहायता करता है। वर्षाजल एकत्रीकरण प्रणालियों से सस्ती स्थानीय सामग्रियों का निर्माण करना और अत्यधिक बसावट वाले स्थलों में सफलतापूर्वक उपयोग करना सरल है। एनएफएल ने वर्ष 2007-08 में एक वर्षा जल एकत्रीकरण परियोजना निष्पादित की है।

रोक बाँध एक छोटा बाँध होता है, जो अस्थायी या स्थायी हो सकता है। इसे किसी छोटी नहर, स्वाले, बॉयोस्वाले या नाले पर बनाया जाता है। ड्रॉप ढांचों की तरह ये मृदा अपरदन तथा नहर में गड्ढ़ों को कम करते हैं तथा तलछट और प्रदूषण-तत्वों को नीचे बैठने देते हैं। इनसे तूफान के दौरान पानी के प्रवाह की गति को भी कम करते हैं। रोक बांधों को लकड़ी के लट्ठों, पत्थर, या रेत की बोरियों से बनाया जा सकता है। अनेक रोक बाँध नहर तालाब बनाते हैं। पानी के कम प्रवाह के कारण पानी या तो जमीन में चला जाता है, वाष्प बनकर उड़ जाता है या बाँध के नीचे से बह जाता है। अत्यधिक प्रवाह (बाढ़) की स्थिति में पानी ढांचे के ऊपर से या नीचे से बह जाता है। मोटी और मध्यम आकार की तलछट रोक बाँध के पीछे जमा हो जाती है, जबकि बारीक दाने प्राय: बह जाने दिए जाते हैं। अतिरिक्त पोषक-तत्व, फोस्फोटस, नाइट्रोजन, भारी धातु, और बहता कूड़ा-करकट रोक बाँध बनने से रूक जाता है या हटा दिया जाता है, जिससे जल गुणवत्ता नियंत्रण उपायों के रूप में उनकी दक्षता बढ़ जाती है। लगभग सभी मामलों में मृदा अपरदन नियंत्रण, जो बॉयोडिग्रेडेबल खुला कवर होती है, का रोक बांधों के जरिए प्रयोग किया जाता है। ये कवर ढलानों, तटीय रेखाओं और गड्ढों के तल में वनस्पति उगाने में मदद करते हैं। एनएफएल ने वर्ष 2007-08 में 3 रोक बाँध परियोजनाएं तथा वर्ष 2009-10 में      1 परियोजना को कार्यान्वित किया था।

कंपोस्ट बनाना एक पारंपरिक मान्यता प्राप्त पद्धति है, जिसमें जैविक सामग्रियों का ढेर तब तक बनाए रखा जाता है जब तक की अगला पौधरोपण मौसम शुरू न हो जाए, तब तक ये सामग्रियां सड़ जाती हैं और मृदा में उपयोग करने के लिए तैयार हो जाती हैं। कृमि-खाद में जैविक अवशिष्ट को खाद बनाने के लिए केंचुओं का प्रयोग किया जाता है। केंचुए व्यावहारिक तौर पर सभी प्रकार के जैविक पदार्थ खा जाते हैं। जैविक सामग्रियां उनकी आंतों में जटिल जैव रासायनिक परिवर्तन से गुजरती हैं और कृमि खाद गैर-जहरीले ठोस और तरल जैविक अपशिष्ट के निपटान की एक उपयुक्त तकनीक है। यह पशुओं के मल, कृषि अपशिष्ट तथा औद्योगिकी कचरों को किफायती और प्रभावी ढंग से रि-साइकिल करती है। वर्ष 2008-09 में देश के विभिन्न गांवों में 72 कृ़मि खाद गड्ढ़े स्थापित किए गए थे।