आधुनिकीकरण और विस्तार

विजयपुर में क्षमता संवर्धन और ऊर्जा संरक्षण परियोजना (ईएसपी)


वित्‍त वर्ष 2012-13 में, कम्‍पनी ने अपनी विजयपुर-। और विजयपुर-।। ईकाइयों में कार्बन डाइऑक्‍साइड रिकवरी संयंत्रों की संस्‍थापना के साथ-साथ क्षमता संवर्धन और ऊर्जा संरक्षण परियोजनाएं भी सफलतापूर्वक आरंभ की हैं। इन परियोजनाओं में लगभग 650 करोड़ रुपए का निवेश निहित है।


पुनर्निर्माण-पूर्व क्षमता

पुनर्निर्माण-पश्‍चात क्षमता

वृद्धिशील उत्‍पादन

यूरिया – I

2620 एमटीपीडी

3030 एमटीपीडी

410 एमटीपीडी

यूरिया – II

2620 एमटीपीडी

3231 एमटीपीडी

611 एमटीपीडी

वार्षिक आधार (यूरिया – Iऔर यूरिया – II)

17.29 एमएमटी

20.66 एमएमटी

3.37 एमएमटी

विजयपुर-। और ।। के इन पुनर्निर्माणों के पूरा होने के बाद कम्‍पनी की कुल वार्षिक यूरिया क्षमता 3.37 एमएमटी से बढ़कर 35.68 एमएमटी हो चुकी है।

संस्‍थापित यूरिया क्षमता के संवर्धन के अतिरिक्‍त, कम्‍पनी ने उत्‍पादित यूरिया प्रति मीट्रिक टन विशिष्‍ट ऊर्जा उपभोग में कमी भी हासिल की है।

पानीपत, बठिंडा और नंगल में ईंधन तेल आधारित संयंत्रों का प्राकृतिक गैस फीडस्‍टॉक में परिवर्तन

कम्‍पनी ने पानीपत, बठिंडा और नंगल में ईंधन तेल से प्राकृतिक गैस में फीडस्‍टॉक परिवर्तन के लिए निम्‍नलिखित पूंजीगत योजनाएं कार्यान्वित की हैं जिनमें रु. 4066 करोड़ रुपए का कुल निवेश किया है |


अमोनिया संयंत्र फीडस्‍टॉक परिवर्तन परियोजना

पानीपत और बठिंडा

नंगल

एलएसटीके कॉंट्रेक्‍टर

मैसर्स लार्सन एंड टूब्रो मुंबई

मैसर्स टेक्‍नीमोंट एसपीए, इटली और मैसर्स टेक्‍नीमोंट आईसीबी, मुंबई का संघ

प्रोसेस लाइसेंसर

मैसर्स हेल्‍डोर टोप्‍सो, डेनमार्क

मैसर्स केलॉग ब्राउन एंड रूट, यूएसए

पोस्‍ट रिवैंप अमोनिया कैपेसिटी, एमटीपीडी

पानीपत और बठिंडा प्रत्‍येक के लिए 900

950

शून्य तिथि

29 जनवरी 2010

29 जनवरी 2010

अनुमानित परियोजना लागत, करोड़ रुपए

2587 (पानीपत और बठिंडा संयुक्‍त)

1479

प्रारंभ होना

जनवरी 2013

अप्रैल 2013

इन फीडस्‍टॉक परिवर्तन परियोजनाओं में फीडस्‍टॉक का एफओ/एलएसएचएस से पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा संसाधन अर्थात एनजी/आरएलएनजी में परिवर्तन निहित है। इन परियोजनाओं के परिणामस्‍वरूप न केवल पर्यावरण बेहतर होगा बल्कि इसके परिणामस्‍वरूप भारत सरकार द्वारा सब्सिडी के भुगतान की वजह से बचत भी होगी।

फीडस्‍टॉक परिवर्तन के पश्‍चात, पानीपत, बठिंडा और नंगल के तीनों संयंत्र डिजाइन की गई दैनिक ऊर्जा के भीतर 100%से अधिक दैनिक मूल्‍यांकित क्षमता पर काम कर रहे हैं।


संयुक्‍त उद्यम

एफसीआइ्रएल की रामगुंडम ईकाई का पुनरूत्‍थान

एनएफएल ने मैसर्स इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) और फर्टिलाजर्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एफसीआईएल) के साथ संयुक्‍त उद्यम के रुप में एफसीआईएल की रामागुंडम इकाई के पुनरुत्‍थान का कार्य शुरु कर दिया है ।  पुनरुत्थान परियोजना में एफसीआईएल की रामागुंडम इकाई के मौजूदा उर्वरक परिसर में 2200 एमटीपीडी के अमोनिया संयंत्र और 3850 एमटीपीडी के यूरिया संयंत्र की स्‍थापना करने की कल्‍पना की गई है।

संयुक्‍त उद्यम में एनएफएल और ईआईएल से प्रत्‍येक द्वारा 26%, एफसीआईएल द्वारा 11%और तेलंगाना राज्‍य सरकार द्वारा 11% इक्विटी भागीदारी की गई है।

परियोजना का कार्यान्‍वयन ईपीसीएम प्रणाली से किया जा रहा है और मैसर्स ईआईएल परियोजना के लिए ईपीएमसी ठेकेदार हैं। परियोजना के पुनरुत्‍थान की शून्य तिथि 25 सितंबर 2015 घोषित की गई है और इसे दिसंबर 2018 तक पूरा किए जाने का लक्ष्‍य है। परियोजना प्रगति पर है।

एनएफएल आरएफसीएल को जनशक्ति प्रबंधन परामर्श (एमएमसी) सेवाएं प्रदान कर रही है।

समझौते के अनुसार, एनएफएल, आरएफसीएल और एनएफएल द्वारा पारस्परिक रूप से सहमत कर्मियों की नई भर्ती कर रहा है और प्रशिक्षण भी दे रहा है | नई भर्ती के अतिरिक्‍त एनएफएल आरएफसीएल को द्वितीयक (सेकंडमेंट) आधार पर अनुभवी जनशक्ति भी उपलब्घ करा रहा है ।

पानीपत में बेंटोनाइट सल्‍फर संयंत्र

बेंटोनाइट सल्‍फर एक सल्‍फर फर्टिलाइजर है जिसका उपयोग पौधों के लिए पौषक  तत्वों के स्रोत के रूप में तथा मिट्टी की क्षारीय समस्या में सुधार करने के लिए किया जाता है | बेंटोनाइट सल्‍फर की मांग को पूरा करने के उद्देश्‍य से और टॉप तथा बॉटम लाइन में सुधार के लिए, एनएफएल ने पानीपत इकाई में 25,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष की क्षमता वाले बेंटोनाइट सल्‍फर संयंत्र की स्‍थापना की है । माननीय केंद्रीय मंत्री (रसायन और उर्वरक) द्वारा 8 सितंबर 2016 को परियोजना का शिलान्‍यास किया गया । पानीपत इकाई में बेंटोनाइट सल्फर संयंत्र में दिनांक 20 दिसम्बर 2017 को उत्पादन प्रारंभ हो चुका है।


विजयपुर में डाई-नाइट्रोजन टेट्रोक्‍साइड (N2O4)संयंत्र 

एनएफएल, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए निर्माण, स्‍वामित्‍व, प्रचालन और आपूर्ति (बीओओएस) मॉडल के आधार पर डाई-नाइट्रोजन टेट्रॉक्‍साइड (N2O4) उत्‍पादन संयंत्र (एनपीपी) की स्‍थापना की प्रक्रिया में है। इसरो N2O4का उपयोग रॉकेट लांच व्‍हीकल्‍स (आरएलवी) के विशिष्‍ट अवस्‍थाओं में ऑक्‍सीडाइजर के रूप में और लांच व्‍हीकल्‍स की अवस्‍थाओं और विशिष्‍ट इंजनों के भू-परीक्षण के लिए भी करता है।

एनएफएल विजयपुर, गुना, मध्‍य प्रदेश में इसरो के लिए उत्‍पाद की आपूर्ति के लिए 1095 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष की क्षमता के N2O4 संयंत्र की स्‍थापना की जाएगी। N2O4 उत्पाद की आपूर्ति विशेष रुप से लम्बे अनुबंध के अनुसार 25 वर्षों के लिए इसरो को की जायेगी |

इस परियोजना के लिए पूंजीगत व्‍यय की आवश्‍यकता लगभग 350 करोड़ रुपये की होगी। प्रौद्योगिकी की आपूर्ति रूस सरकार और भारत सरकार के बीच रणनीतिक सहयोग के तहत रूसी कम्‍पनी द्वारा की जाएगी। एनएफएल और इसरो के बीच 4 मई, 2017 को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं। त्रिपक्षीय करार पर हस्‍ताक्षर करने के लिए इसरो, एनएफएल और रूसी प्रौद्योगिकी प्रदाता के बीच विचार विमर्श चल रहे हैं।

विजयपुर-।। में पर्ज गैस रिकवरी संयंत्र

एनएफएल निरंतर ऊर्जा में कमी लाने और उत्‍पादन में सुधार लाने की दिशा में काम कर रही है। तदनुसार, कम्‍पनी के विजयपुर-।। संयंत्र में पर्ज गैस रिकवरी (पीजीआर) ईकाई की स्‍थापना करने की योजना बनाई गई है और साथ ही विजयपुर-। में पीजीआर ईकाई पहले ही स्‍थापित की जा चुकी है।

विजयपुर-।। संयंत्र में प्रौद्योगिकी का चयन करने और एलएसटीके आधार पर पर्ज गैस रिकवरी (पीजीआर) संविदा तैयार करने के लिए पीडीआईएल को परामर्श संविदा प्रदान की गई है।

विजयपुर में खारे पानी का संयंत्र

एनएफएल ने अपनी विजयपुर ईकाई में 120 मीट्रिक टन प्रति वर्ष खारे पानी के संयंत्र की स्‍थापना की परिकल्‍पना की गई है, जिसके लिए भारी पानी बोर्ड के साथ प्रारंभिक व्‍यवहार्यता अध्‍ययन किया जा रहा है।